श्री विष्णु स्तोत्र एक दिव्य स्तुति है जो भगवान विष्णु की महानता और उनके संरक्षणकारी स्वरूप का गुणगान करती है। यह स्तोत्र सनातन धर्म के भक्तों के लिए अत्यंत पूजनीय है, क्योंकि भगवान विष्णु को जगत के पालनकर्ता और धर्म के संरक्षक के रूप में माना जाता है। इस स्तोत्र का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह भक्तों को जीवन की कठिनाइयों से उबारकर आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर करता है। श्री विष्णु के विविध अवतारों और गुणों का इसमें सुंदर वर्णन मिलता है, जो श्रद्धालुओं को भक्ति में गहराई प्रदान करता है। जब इस स्तोत्र का पाठ श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है, तो यह जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता की राह खोलता है।
Shri Vishnu Stotra Lyrics – श्री विष्णु स्तोत्र
॥ श्री विष्णु स्तोत्र॥
किं नु नाम सहस्त्राणि जपते च पुनः पुनः ।
यानि नामानि दिव्यानि तानि चाचक्ष्व केशवः ।। १ ।।
मत्स्यं कूर्मं वराहं च वामनं च जनार्दनम् ।
गोविन्दं पुण्डरीकाक्षं माधवं मधुसूदनम् ।। २ ।
पदनाभं सहस्त्राक्षं वनमालिं हलायुधम् ।
गोवर्धनं ऋषीकेशं वैकुण्थं पुरुषोत्तमम् ।। ३ ।।
विश्वरूपं वासुदेवं रामं नारायणं हरिम् ।
दामोदरं श्रीधरं च वेदांग गरुड़ध्वजम् ।। ४ ।
अनन्तं कृष्णगोपालं जपतो नास्ति पातकम् ।
गवां कोटिप्रदानस्य अश्वमेधशतस्य च ।। ५ ।।
कन्यादानसहस्त्राणां फलं प्राप्नोति मानवः ।
अमायां वा पौर्णमास्यामेकाद्श्यां तथैव च ।। ६ ।।
संध्याकाले स्मरेन्नित्यं प्रातःकाले तथैव च ।
मध्याहने च जपन्नित्यं सर्वपापैः प्रमुच्यते ।। ७ ।
।। इति श्री विष्णु स्तोत्र संपूर्णम् ।।




